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पटना
पटना की एक झलक
बिस्कोमान भवन, पटना

पटना
प्रदेश
 - जिला
बिहार
 - पटना जिला
स्थान 25.35° N 85.12° E
क्षेत्रफल   वर्ग कि.मी.
समय मण्डल IST (UTC+5:30)
जनसंख्या (2001)
 - घनत्व
12 लाख
 - /वर्ग कि.मी.
उपायुक्त
सांसद श्री रामकृपाल यादव
संकेतक
 - डाक
 - दूरभाष
 - वाहन
 
 - 800 0xx
 - +91 (0)612
 - BR-01-?
प्राचीन नाम पाटलिपुत्र


पटना भारत में बिहार प्रान्त की राजधानी है। पटना का प्राचीन नाम पाटलीपुत्र था। आधुनिक पटना दुनिया के गिने-चुने उन विशेष प्रचीन नगरों में से एक है जो अति प्राचीन काल से आज तक आबाद है। अपने आप में इस शहर का एक अत्यंत हीं ऐतिहासिक महत्व है|

ईसा पूर्व मेगास्थनीज(350 ईपू-290 ईपू) ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी अपनी पुस्तक इंडिका में इस नगर का उल्लेख किया है | पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र)जो गंगा और अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) के संगम पर बसा था । उस पुस्तक के आकलनों के हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि.मी.) लम्बा तथा 1.75 मील(2.8) कि.मी. चौड़ा था ।

आधुनिक पटना बिहार राज्य की राजधानी है और गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है| जहां पर गंगा ,अपनी घाघरा, सोन और गंडक जैसी सहायक नदियों से मिलती है । यहां पर पावन गंगा नदी का स्वरुप नदी के जैसा न होकर सागर जैसा विराट दिखता है - अनन्त और अथाह! मन को प्रसन्न कर देनेवाली एक विशाल प्रवाह!

बारह लाख (12,00,000) की आवादी वाला यह शहर, लगभग 15 कि.मी. लम्बा और 7 कि.मी. चौड़ा है ।.

प्राचीन बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया और पावापुरी पटना शहर के आस पास ही अवस्थित हैं । पटना सिक्खों के लिये एक अत्यंत हीं पवित्र स्थल है | सिक्खों के 10वें तथा अंतिम गुरु गुरू गोबिंद सिंह का जन्म पटना में हीं हुआ था| प्रति वर्ष देश-विदेश से लाखों सिक्ख श्रद्धालु पटना में हरमंदिर साहब के दर्शन करने आते हैं तथा मत्था टेकते हैं|

पटना एवं इसके आसपास के प्राचीन भग्नावशेष/खंडहर नगर के ऐतिहासिक गौरव का मौन गवाह है तथा नगर की प्राचीन गरिमा को आज भी प्रदर्शित करता हैं |

एतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के अतिरिक्त, पटना शिक्षा औरचिकित्सा का भी एक प्रमुख केन्द्र है । यह एक दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि, केन्द्र सरकार की उपेक्षा और राज्य सरकार की उदाशीनता (चिन्ताहीनता) के कारण शैक्षणिक संस्थानों (जो कि काफी पुराने और देश के शीर्षस्थ रहे हैं), की हालत, पिछले एक दशक से चिन्ताजनक होती जा रही है ।

दीवालों से घिरा नगर का पुराना क्षेत्र, जिसे पटना सिटी के नाम से जाना जाता है, एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र है ।

अनुक्रम

नाम

पटना नाम पटन (एक हिन्दू देवी ) से आया है । एक और मत के अनुसार यह नाम संस्कृत के पत्तन से आया है जिसका अर्थ तटीय बन्दरगाह होता है । नगर पिछली दो सहस्त्राब्दियों में कई नाम पा चुका है - पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमपुर, अजीमाबाद और पटना ।


इतिहास

मुख्य लेख: पटना का इतिहास

लोककथाओं के अनुसार, राजा पत्रक को पटना का जनक कहा जाता है, जिसने अपनी रानी पाटलि के लिये जादू से इस नगर का निर्माण किया । इसी कारण नगर का नाम पाटलिग्राम पड़ा । पाटलिपुत्र नाम भी इसी के कारण पड़ा । संस्कृत में पुत्र का अर्थ पुत्र या बेटा तथा ग्राम का अर्थ गांव होता है ।

पुरातात्विक अनुसंधानो के अनुसार पटना का इतिहास 490 ईसा पूर्व से होता है जब शिशुनाग वंश के शासक अजातशत्रु ने अपनी राजधानी राजगृह से बदलकर यहां स्थापित की, क्योंकि वैशाली के लिच्छवियों से संघर्ष में उपयुक्त होने के कारण पाटलिपुत्र राजगृह की अपेक्षा सामरिक दृष्टि से अधिक रणनीतिक स्थान पर था । उसने गंगा के किनारे यह स्थान चुना और अपमा दुर्ग स्थापित कर लिया । उस समय से ही इस नगर का लगातार इतिहास रहा है - ऐसा गौरव दुनिया के बहुत कम नगरों को हासिल है । बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध अपने अन्तिम दिनों में यहां से गुजरे थे । उन्होने ये भविष्यवाणी की थी कि नगर का भविष्य उज्जवल होगा, पर कभी बाढ़, आग या आपसी संघर्ष के कारण यह बर्बाद हो जाएगा ।

मौर्य साम्राज्य के उत्कर्ष के बाद पाटलिपुत्र सत्ता का केन्द्र बन गया । चन्द्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य बंगाल की खाड़ी से अफ़ग़ानिस्तान तक फैल गया था । शुरूआती पाटलिपुत्र लकड़ियों से बना था, पर सम्राट अशोक ने नगर को शिलाओं की संरचना मे तब्दील किया । चीन के फाहियान ने, जो कि सन् 399-414 तक भारत यात्रा पर था, अपने यात्रा-वृतांत में यहां के शैल संरचनाओं का जीवन्त वर्णन किया है ।

मेगास्थनीज़, जो कि एक युनानी इतिहासकार और चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में एक राजदूत के नाते आया था, ने पाटलिपुत्र नगर का प्रथम लिखित विवरण दिया । ज्ञान की खोज में , बाद में कई चीनी यात्री यहां आए ऐर उन्होने भी यहां के बारे में, अपने यात्रा-वृतांतों में लिखा है ।

इसके पश्चात नगर पर कई राजवंशों का राज रहा । इन राजाओं ने यहीं से भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया । गुप्त वंश के शासनकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है । पर इसके बाद नगर को वह गैरव नहीं मिल पाया जो एक समय मौर्य वंश के समय प्राप्त था ।

गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद पटना का भविष्य काफी अनिश्चित रहा । 12 वीं सदी में बख़्तियार खिलजी ने बिहार पर अपना अधिपत्य जमा लिया और कई आध्यात्मिक प्रतिष्ठानों को ध्वस्त कर डाला । पटना देश का सांस्कृतिक और राजनैतिक केन्द्र नहीं रहा ।

मुगलकाल में दिल्ली के सत्ताधारियों ने यहां अपना नियंत्रण बनाए रखा । इस काल में सबसे उत्कृष्ठ समय तब आया जब शेरसाह सूरी ने नगर को पुनर्जीवित करने की कोशिश की । उसने गंगा के तीर पर एक किला बनाने की सोची । उसका बनाया कोई दुर्ग तो अभी नहीं है, पर अफ़ग़ान शैली में बना एक मस्जिद अभी भी है ।

मुगल बादशाह अकबर 1574 में अफ़गान सरगना दाउद ख़ान को कुचलने पटना आया । अकबर के राज्य सचिव एवम् आइने अकबरी के लेखक (अबुल फ़जल) ने इस जगह को कागज, पत्थर तथा शीशे का सम्पन्न औद्योगिक केन्द्र के रूप में वर्णित किया है । पटना राइस के नाम से यूरोप में प्रसिद्ध चावल के विभिन्न नस्लों की गुणवत्ता का उल्लेख भी इन विवरणों में मिलता है ।

मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने प्रिय पोते मुहम्मद अज़ीम के अनुरोध पर 1704 में, शहर का नाम अजीमाबाद कर दिया । अज़ीम उस समय पटना का सूबेदार था । पर इस कालखंड में, नाम के अतिरिक्त पटना में कुछ विशेष बदलाव नहीं आया ।

मुगल साम्राज्य के पतन के साथ ही पटना बंगाल के नबाबों के शासनाधीन हो गया जिन्होंने इस क्षेत्र पर भारी कर लगाया पर इसे वाणिज्यिक केन्द्र बने रहने की छूट दी । १७वीं शताब्दी में पटना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र बन गया । अंग्रेज़ों ने 1620 में यहां रेशम तथा कैलिको के व्यापार के लिये यहां फैक्ट्री खोली । जल्द ही यह सॉल्ट पीटर (पोटेशियम नाइट्रेट) के व्यापार का केन्द्र बन गया जिसके कारण फ्रेंच और डच लोग से प्रतिस्पर्धा तेज हुई ।

बक्सर के निर्णायक युद्ध के बाद नगर इस्ट इंडिया कंपनी के अधीन चला गया और वाणिज्य का केन्द्र बना रहा ।

1912, में बंगाल के विभाजन के बाद, पटना उड़ीसा तथा बिहार की राजधानी बना । आई एफ़ मुन्निंग ने पटना के भवनों का निर्माणस किया - संग्रहालय, उच्च न्यायालय विधानसभा भवन इत्यादि का श्रेय उन्ही को जाता है । कुछ लोगों का कहना है कि पटना के नए भवनों के निर्माण में हासिल हुई महारथ दिल्ली के शासनिक क्षेत्र के निर्माण में बहुत काम आई ।

1935 में उड़ीसा बिहार से अलग कर एक राज्य बना दिया गया । पटना राज्य की राजधानी बना रहा ।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नगर ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । नील की खेती के लिये चम्पारण का आन्दोलन तथा 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन इनमें से कुछ उल्लेखनीय नाम है । आजादी के बाद पटना बिहार की राजधानी बना रहा । 2000 में झारखंड राज्य के बनने के बाद अभी तक यह बिहार की राजधानी है ।

भूगोल

पटना गंगा के दक्षिणी तट पर स्थित है, जो नगर के साथ एक लम्बी तट रेखा बनाती है । पटना का विस्तार पूर्व-पश्चिम में उत्तर-दक्षिण की अपेक्षा बहुत अधिक है । नगर तीन ओर से गंगा, सोन नदी और पुनपुन नदी नदियों से घिरा है । नगर से ठीक उत्तर गंगा के उस पार गंडक नदी भी गंगा में आ मिलती है ।

महात्मा गांधी सेतु जो कि पटना से हाजीपुर को जोड़ने को लिये गंगा नदी पर उत्तर-दक्षिण की दिशा में बना एक पुल है, दुनिया का सबसे लम्बा, एक ही नदी पर बना, सड़क पुल है । इसकी लम्बाई 5800 मीटर है ।

  • अक्षांश: 53 मीटर
  • तापमान: गर्मी 43 °C - 21 °C, सर्दी 20 °C - 6 °C
  • वर्षा (औसत): 1,200 mm

जलवायु

बिहार के अन्य भागों की ही तरह पटना में भी गर्मी का तापमान उच्च रहता है । गृष्म ऋतु में सूरज का सीधा सूर्यातप तथा उष्ण तरंगों के कारण गर्मी असह्य हो जाती है । हंलाकि यह देश के शेष मैदानी भागों (यथा - दिल्ली) की अपेक्षा कम होता है । चार बड़ी नदियों के समीप होने के कारण नगर की आर्द्रता सालोभर अधिक रहती है ।

गृष्म ऋतु अप्रैल में आरंभ होकर जून जुलाई के महीने में अपने चरम पर होती है जब तापमान 46 डिग्री तक पहुंच जाता है । जुलाई में मॉनसून की झड़ियों से राहत पहुंचती है और वर्षा ऋतु का श्रीगणेश होता है । नवंबर से शीत ऋतु आरंभ होती है जो फरवरी तक चलती है । फरवरी में वसंत का आगमन होता है तथा मार्च में इसके अवसान के साथ ही ऋतु - चक्र पूरा हो जाता है ।

जनवितरण

पटना की जनसंख्या 12,85,470 (2001 जनगणना) है, जो कि 1991 में 9,17,243 थी । जनसंख्या का घनत्व 1132 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर । स्त्री पुरूष अनुपात है - 839 स्त्री प्रति 1,000 पुरूष । साक्षरता की दर 62.9%, स्त्री साक्षरता 50.8% है ।

(स्रोत -जिला प्राथमिक शिक्षा रिपोर्ट 2004, राष्ट्रीय शैक्षणिक नियोजन और प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली ) (www.eduinfoindia.net)

पटना में अपराध की दर अपेक्षाकृत कम है । मुख्य जेल बेउर में है ।

पटना में कई भाषाएं तथा बोलियां बोली जाती हैं । हिन्दी राज्य की आधिकारिक भाषा है । अंग्रेजी का भी प्रयोग होता है । मगही यहां की स्थानीय भाषा है । अन्य भाषाएं, जो कि बिहार के अन्य भागों से आए लोगों की मातृभाषा है, में अंगिका, भोजपुरीऔर मैथिली प्रनुख हैं । अन्य भाषाओं में बांग्ला और उड़िया का नाम लिया जा सकता है ।

पटना के मेमन को पाटनी मेमन कहते है और उनकी भाषा मेमनी भाषा का एक स्वरूप है ।

जनजीवन

पटना का मुख्य जनजीवन अंग तथा मिथिला प्रदेशों से काफी प्रभावित है । यह संस्कृति बंगाल से मिलती जुलती है ।

स्त्रियों की दशा

स्त्रियों का परिवार में सम्मान होता है तथा पारिवारिक निर्णयों में उनकी बात भी सुनी जाती है । यद्यपि स्त्रियां अभी तक घर के कमाऊ सदस्यों में नहीं हैं पर उनकी दशा उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों से अच्छी है । कही कहीं स्त्रियों का शोषण भी होता है ।

विवाह

अधिकतर शादियां माता-पिता के द्वारा ही निर्धारित-निर्देशानुसार होती है । विवाद में संतान की इच्छा की मान्यता परिवार पर निर्भर करती है । विवाह को पवित्र माना जाता है । शादी उत्सव की तरह मनाई जाती है और इस दौरान संस्कृतिक कार्यक्रमों की भरमार रहती है । वास्तव में यदि कुछेक पर्वों को छोड़ दिया जाय तो विवाह के अवसर पर ही कला की सर्वोत्तम झांकी मिल पाती है । इस अवसर पर खर्च और भोजों की अधिकता रहती है । दहेज का चलन अबतक कई परिवारों में बना हुआ है ।

संस्कृति

===पर्व-त्यौहार दीवाली, दुर्गापूजा, होली, ईद, क्रिसमस आदि लोकप्रियतम पर्वो में से है ।

दशहरा

मुख्य लेख देखें: पटना में दशहरा

दशहरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की लम्बी पर क्षीण होती परम्परा है ।इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1944 में मध्य पटना के गोविंद मित्रा रोड मुहल्ले से हुई थी । धुरंधर संगीतज्ञों के साथ-साथ बड़े क़व्वाल और मुकेश या तलत महमूद जैसे गायक भी यहाँ से जुड़ते चले गए ।

1950 से लेकर 1980 तक तो यही लगता रहा कि देश के शीर्षस्थ संगीतकारों का तीर्थ-सा बन गया है पटना । डीवी पलुस्कर, ओंकार नाथ ठाकुर, भीमसेन जोशी, अली अकबर ख़ान, निखिल बनर्जी, विनायक राव पटवर्धन, पंडित जसराज, कुमार गंधर्व, बीजी जोग, अहमद जान थिरकवा, बिरजू महाराज, सितारा देवी, किशन महाराज, गुदई महाराज, बिस्मिल्ला ख़ान, हरिप्रसाद चौरसिया, शिवकुमार शर्मा ... बड़ी लंबी सूची है । पंडित रविशंकर और उस्ताद अमीर ख़ान को छोड़कर बाक़ी प्रायः सभी नामी संगीतज्ञ उन दिनों पटना के दशहरा संगीत समारोहों की शोभा बन चुके थे ।

60 वर्ष पहले पटना के दशहरा और संगीत का जो संबंध सूत्र क़ायम हुआ था वह 80 के दशक में आकर टूट-बिखर गया । उसी परंपरा को फिर से जोड़ने की एक तथाकथित सरकारी कोशिश वर्ष 2006 के दशहरा के मौक़े पर हुई लेकिन नाकाम रही ।

खान-पान

आबादी का मुख्य भोजन भात-दाल-रोटी-तरकारी-अचार है । सरसों का तेल पारम्परिक रूप से खाना तैयार करने में प्रयुक्त होता है । खिचड़ी , जोकि चावल तथा दालों से साथ कुछ मसालों को मिलाकर पकाया जाता है, भी भोज्य व्यंजनों में काफी लोकप्रिय है । खिचड़ी, प्रायः शनिवार को, दही, पापड़, घी, अचार तथा चोखा के साथ-साथ परोसा जाता है ।

पटना को केन्द्रीय बिहार के मिष्ठान्नों तथा मीठे पकवानों के लिए भी जाना जाता है । इनमें खाजा, मावे का लड्डू,मोतीचूर के लड्डू, काला जामुन, केसरिया पेड़ा, परवल की मिठाई, खुबी की लाई और चना मर्की का नाम लिया जा सकता है । इन पकवानो का मूल इनके सम्बन्धित शहर हैं जो कि पटना के निकट हैं, जैसे कि सिलाव का खाजा, बाढ का मावे का लड्डू,मनेर का लड्डू, विक्रम का काला जामुन, गया का केसरिया पेड़ा, बख्तियारपुर का खुबी की लाई (???) का चना मर्की, बिहिया की पूरी इत्यादि उल्लेखनीय है । हलवाईयों के वंशज, पटना के नगरीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में बस गए इस कारण से यहां नगर में ही अच्छे पकवान तथा मिठाईयां उपलब्ध हो जाते हैं । बंगाली मिठाईयों से, जोकि प्रायः चाशनी में डूबे रहते हैं, भिन्न यहां के पकवान प्रायः सूखे रहते हैं ।

इसके अतिरिक्त इन पकवानों का प्रचलन भी काफी है -

  • पुआ, - मैदा, दूध, घी, चीनी मधु इत्यादि से बनाया जाता है ।
  • पिठ्ठा - चावल के चूर्ण को पिसे हुए चने के साथ या खोवे के साथ तैयार किया जाता है ।
  • तिलकुट - जिसे बौद्ध ग्रंथों में पलाला नाम से वर्णित किया गया है, तिल तथा चीनी गुड़ बनाया जाता है ।
  • चिवड़ा या च्यूरा' - चावल को कूट कर या दबा कर पतले तथा चौड़ा कर बनाया जाता है । इसे प्रायः दही या अन्य चाजो के साथ ही परोसा जाता है ।
  • मखाना - (पानी में उगने वाली फली) इसकी खीर काफी पसन्द की जाती है ।
  • सत्तू - भूने हुए चने को पीसने से तैयार किया गया सत्तू, दिनभर की थकान को सहने के लिए सुबह में कई लोगो द्वारा प्रयोग किया जाता है । इसको रोटी के अन्दर भर कर भी प्रयोग किया जाता है जिसे स्थानीय लोग मकुनी रोटी कहते हैं ।
  • लिट्टी चोखा - लिट्टी जो आंटे के अन्दर सत्तू तथा मसाले डालकर आग पर सेंकने से बनता है, को चोखे के साथ परोसा जाता है । चोखा उबले आलू या बैंगन को गूंथने से तैयार होता है ।

आमिष व्यंजन भी लोकप्रिय हैं । मछली काफी लोकप्रिय है, और मुग़ल व्यंजन भी पटना में देखे जा सकते हैं । अभी हाल में कॉन्टिनेन्टल खाने भी लोगों द्वारा पसन्द किये जा रहे हैं । कई तरह के रोल, जोकि न्यूयॉर्क में भी उपलब्ध हैं, का मूल पटना ही है । विभाजन के दौरान कई मुस्लिम परिवार पाकिस्तान चले गए और बाद में अमेरिका । अपने साथ -साथ वो यहां की संस्कृति भी ले गए । वे कई शाकाहारी तथा आमिष रोलों रोल-बिहारी नाम से, न्यूयार्क में बेचते हैं ।

यातायात

Patna railway station
Patna railway station

भारतीय रेल द्वारा पटना देश के अन्य सभी महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ा है । पटना से जाने वाले रेलवे मार्ग हैं- पटना-मोकामा, पटना-मुगलसराय' तथा पटना-गया । यह पूर्व रेलवे की मुख्य मार्ग पर स्थित है ।

पटना में एक राष्ट्रीय हवाई पट्टी भी है जिसका नाम लोकनायक जयप्रकाश नारायण हवाईअड्डा रखा गया है । यहां से दिल्ली, रांची, कलकत्ता, मुम्बई तथा कुछ अन्य नगरों के लिए नियमित सेवा उपलब्ध है ।

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31, नगर के पास से होकर गुजरता है । पटना से बिहार के अन्य शहर भी सड़क मार्ग से जुड़े हैं । बिहार के सभी तथा झारखंड के कुछ शहरों के लिए नियमित बस-सेवा उपलब्ध है।

गंगा नदी का प्रयोग यातायात के लिए हाल तक किया जाता था पर इसके उपर पुल बन जाने के कारण इसका परिवहन के कामों में महत्व नही रहा ।

स्थानीय परिवहन - बस सेवा कुछ इलाको के लिए उपलब्ध है पर नगर की मुख्य परिवहन सेवा ऑटोरिक्शा है (जिसे टेम्पो भी कहा जाता है ) ।

आर्थिक स्थिति

प्राचीन काल में व्यापार का केन्द्र रहे इस शहर में अब निर्यात करने लायक कम उपादान ही बनते हैं, हंलांकि बिहार के अन्य हिस्सों में पटना के पूर्वी पुराने भाग (पटना सिटी) निर्मित माल की मांग होने के कारण कुछ उद्योग धंधे फल फूल रहे हैं ।

भ्रमणीय स्थल

पटना में देखने लायक निम्नलिखित स्थल हैं |

  • अगम कुआँ – मौर्य साम्राज्य के शासक अशोक के काल का एक कुआँ
  • हनुमान मन्दिर पटना जंक्शन के रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर खड़ा भुवन ।
  • कुम्हरार -असोककालीन पाटलिपुत्र के भग्नावशेष ।
  • गोलघर पटना का एक आकाशीय चित्र तथा साथ में गंगा की धार का नजारा ही इस ब्रिटिश निर्मित इमारत की प्रसिद्धि का कारण है । अगल बगल बड़ी इमारतों के बनने से इसकी लोकप्रियता कम हुई है ।
  • पटना संग्रहालय जादूघर के नाम से भी जानेवाले इस म्यूज़ियम में हिन्दू तथा बौद्ध धर्म की कई निशानियां हैं ।
  • ख़ुदाबख़्श लाईब्रेरी: यहां कुछ अतिदुर्लभ प्रतियां हैं ।
  • बेगू हज्जाम की मस्जिद, सन् 1489 में बंगाल के शासक अलाउद्दीन शाह द्वारा निर्मित
  • 'पत्थर की मस्जिद - शाहजहां के बड़े भाई परवेज़ द्वारा निर्मत ।
  • क़िला हाउस (जालान हाउस) दीवान बहादुर राधाकृष्णन जालान द्वारा निर्मित इस भवन में हीरे जवाहरात का एक संग्रहालय है ।
  • सदाक़त आश्रम - देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद की कर्मभूमि ।
  • जैविक उद्यान - संजय गांधी जैविक उद्यान पिकनिक तथा जन्तु तथा वनस्पति वैज्ञानिकों के लिए पसंदीदा स्थल है ।
  • पादरी की हवेली - 1772 में निर्मित चर्च - बिहार का प्राचीनतम ।
  • बांकीपुर क्लब गंगा के तीर पर स्थित इस क्लब को डच लोगो द्वारा 17वीं सदी में निर्मित क्लबों में से एक गिना जाता है ।
  • दरभंगा हाउस, इसे नवलखा भवन भी कहते हैं । इसका निर्माण दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह ने करवाया था । गंगा के तट पर अवस्थित इस प्रासाद में पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों का कार्यालय है । इसके परिसर में एक काली मन्दिर भी है जहां राजा खुद अर्चना किया करते थे ।
  • पटना कॉलेज़ - इसके प्रशासकीय भवन पहले डच गांजा (प्रमाण चाहिए) कारखाने के हिस्से थे जो कि नेपाल तथा चीन से व्यापार करने के लिए गंगा के तीर पर बनाया गया था ।
  • गांधी मैदान ब्रिटिश शासन के दौरान इसे पटना लॉन्स कहा जाता था । जनसभाओं तथा रैलियों जैसे सम्मेलनों के अतिरिक्त पुस्तक मेला तथा दैनिक व्यायाम का भी केन्द्र है ।

पटना के आसपास

शिक्षा

यह लेख भी देखें - खुदाबक़्श लाइब्रेरी


साठ और सत्तर के दशक में अपने गौरवपूर्ण शैक्षणिक दिनों के बाद स्कूली शिक्षा ही अब स्तर की है । प्रायः बिहार बोर्ड तथा सीबीएसई के स्कूल हैं । हाल में ही बिहार कॉलेज ऑफ़ इंज़ीनियरिंग कोएनआईटी का दर्जा मिला है । पटना यूनिवर्सिटी, मगध विश्वविद्यालय तथा नालन्दा ओपेन यूनिवर्सिटी वे तीन विश्वविद्यालय है जिनके शिक्षण संस्थान नगर में स्थित है ।

बाहरी कड़ियाँ


स्रोत्र

  • "Patna," Microsoft® Encarta® Encyclopedia 2001


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